गुरुवार, 14 जनवरी 2016

क़िता -1 ( मुक्तक ) सलीम रज़ा रीवा MUKTAK SALIM RAZA REWA

इब्तदा तुझी से है इन्तहा तुझी से है ,
ये निज़ाम दुनिया का ऐ खुदा तुझी से है !
जिन्नों इंसा बहरो बर सब तेरे करिश्मे है ,
इस जहाने फ़ानी में जो बना तुझी से है !!

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