आँसू प्यार के अहसास का प्रतीक होते हैं
दिल के दर्द का बयां करते हैं
दिल को ठेस लगे तो उमड़ आते हैं
अपनों की जुदाई में अक्सर छलक जाते हैं
वक्त बदला,दुनिया बदली
इसके साथ अहसासों की परिभाषा बदली
अब वक्त कहता है ये बनावट होते हैं
जो पलकों में अटके होते हैं
बात मनवाने को,हार को जीत में बदलने को
अपना सिक्का दूसरों पर जमाने को
जब जी चाहे
पलकों की चिलमन छोड़
गालों पर फिसल जाते हैं।
“मीना भारद्वाज”

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