न छेड़ो यारो मुझे मेरे हालात पे रहने दो !
मिले जो जख्म जमाने से मुझे सहने दो !!
कल मेरी मुस्कराहट से जलते थे लोग !
हुई बद्दुआ कबूल आज उन्हें ख़ुश रहने दो !!
इल्तज़ा रखते थे कब से हमे रुलाने की !
न रोको आँखों के अश्क अब बहने दो !!
वफ़ा के नाम से अगर हो जाए वो मशहूर !
फिर शौक से हमे बेवफा,उनको कहने दो !!
मगर कर एक अहसान “धर्म” पर तू इतना
न कर मजबूर, बात दिल की दिल में रहने दो !!
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डी. के. निवातिया _______

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