”संवर जाओगे” हमारी ज़ुल्फ़ के साये में संवर जाओगे , हमारी आँख के काजल में ठहर जाओगे , जो फूल बनके घर-घर में महकना चाहो , हमारे प्यार की खुशबू से निखर जाओगे || शकुंतला तरार रायपुर (छत्तीसगढ़)
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