नफरत ही नफरत है
मोहब्बत का निशां नहीं
इतनी नफरत देखकर
खुदा भी हैरान है।
ज़ुल्म इतनी सादगी से है
जबरदस्ती का निशां नहीं
इतना विष देखकर
सर्प भी हैरान है।
राही बेबस ही बेबस है
संदेशे का इंतज़ाम नहीं
सफर ऐसा देखकर
मंज़िलें भी हैरान है।
फिर भी जश्न इस कदर मना रहा है
परवाही का निशां नहीं
इतनी उमंगें देखकर
नफरत भी हैरान है।

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