मंगलवार, 19 जनवरी 2016

"में वो अल्फ़ाज़ हूँ"...

“में वो अल्फ़ाज़ हूँ”

हमसे हमारी पहचान बस इतना ही पाओगे तुम…
मैं वो अल्फ़ाज़ हूँ जो हर वक़्त गुनगुनाओगे तुम….

बस जाएँगे तुम्हारी रूह मे हम कुछ इस क़दर…
हो जाएगी तुम्हे हमारी लत्त कुछ इस क़दर…
इक पल भी हमारे बिन ना रह पाओगे तुम..
मैं वो अल्फ़ाज़ हूँ जो हर वक़्त गुनगुनाओगे तुम….

तड़प उठोगे जब हम नज़रों से ओझल हो जायेंगे…
कुछ इस क़दर “इंदर” हम तुम्हारी चाहत हो जायेंगे….
हर जगह बस हमे ही पाओगे तुम…..
मैं वो अल्फ़ाज़ हूँ जो हर वक़्त गुनगुनाओगे तुम….

०५/०७/२०१५ @ इंदर भोले नाथ…

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