सोमवार, 18 जनवरी 2016

मेरी डायरी के पन्ने - भाग- ४

दिन शुरू होता है मेरा रात के अँधेरे मे , आया जब बालम मेरा घेरा बाँहो के घेरे मे ,
शर्म देख के मेरी शमा भी शरमा के बुझ गयी,रोशन हुई सुबह मेरी रात के अँधेरे मे ,
दिन भर मै श्रृंगार करू पिया तेरे प्यार मे,रात मिलन की आएगी अब बस इसी इंतज़ार मे,
जुगनुओं अब न चमको तुम रात के अँधेरे मे, आया है बालम मेरा घेरा बाँहो के घेरे मे,
ठंडी सी ये रात है, फिर भी तन-मन मे आग लगी,
पिया मेरे अब तो आओ, मिलन की तुमसे प्यास जगी,
रूप मेरा चमके है, इस रात के अँधेरे मे,
पिया मेरे अब तो आओ, घेरो बाँहो के घेरे मे,

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