सोमवार, 18 जनवरी 2016

मेरी डायरी के पन्ने- भाग -३

खूब हसीं चेहरा है , निगाहें क्या क़यामत है,
उफ़ ये मदमस्त जवानी, लाखो दिलो पे आफत है,
भीगी- भीगी ज़ुल्फो से जब बुँदे शबनम की टपकती है,
लाखो दिलो की धड़कने कभी थमती है, कभी धड़कती है,
उफ़ ये झीना आँचल जब कंधो से सरकता है,
भर जाता है नशे से पैमाना पलकों का, तेरी सरकन से ये छलकता है,
झुकी हुई पलकों से क्या खूब हया झलकती है,
घटा बन के मुझपे जो सावन सी बरसती है,
गुलाब से इन होठो से जब बातें तू करती है,
मचलते इस दिल को एक सुकून की रहत मिलती है,
सलामत रहे युही हुस्न तेरा ऐ हसीना,
येही बस तेरे पागल, दीवाने की चाहत है,
खूब हसी चेहरा है, निगाहे क्या क़यामत है,

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