गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

इज़्तराब...!!

किसी ने
मेरी तन्हाईंयों को चुराकर
अपनी पलकों के ज़िद में
रख ली है
अब मुझे बज़्म है
न फुर्क़त का गुमां
जैसे खोटे सिक्के की तरह
मेरी ज़िंदगी के चित और पट
एक ही दिखते हैं
और खड़ी है
खिसकी हुई साँसों की ज़मीं पर…!!
(C)Md.Parwez Alam

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