मज़ा आता है दूजे की बुराई में l
ये दिल बाग़-बाग़ हो जाता है ll
औरो के लिए समय हो न हो l
इसके लिए समय निकल जाता है ll
बेशक लाख कमियाँ हो अपने में l
वो कभी किसी को नज़र नहीं आती ll
दूजे की एक कमी को पाकर l
बार-बार उंगलियों पर गिनी जाती ll
जितना समय लगाते है बुराई में l
यदि वो समय अच्छाई में लगाये ll
इससे अपनी कमियाँ भी दूर होंगी l
और शायद दूजे को अपनापन दे पाये ll
समय किसी के रोके नहीं रूकता l
फिर बुराई में क्यों समय गवाना ll
समय का सदुपयोग करो मेरे भाई l
क्योकि समय फिर वापस नहीं आना ll
बुराई अपनों से अपनों को दूर करेंl
अच्छाइयाँ गैरों को अपना बनाती है ll
एक उंगली दूजे की तरफ जब उठती है l
तो बाकि तीन अपनी तरफ ही आती है ll

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