शनिवार, 9 जनवरी 2016

मेरे महबूब कभी मिलने मिलाने आजा GAZAL SALIM RAZA REWA

! GAZAL !
मेरे महबूब कभी मिलने मिलाने आजा
मेरी सोई हुई तक़दीर जगाने आजा !

तेरी आमद को समझ लुगा मुक़द्दर अपना
रूह बनके मेरी धड़कन मे समाने आजा !

मैं तेरे प्यार की खुश्बू से महक जाऊगा
गुलशने दिल को मुहब्बत से सजाने आजा !

तेरी उम्मीद ज़माने से लिए बैठे हैं
कर के वादा जो गये थे वो निभाने आजा !

मेरे सपनो का महल तेरे बिना सूना है
मेरे ख़ाबों को तू रंगीन बनाने आजा !

तेरी हर एक अदा जान से प्यारी मुझको
तू हंसाने न सही मुझको सताने आजा !

अब तड़प दिल की नही और सही जाती है
प्यार की कोई ग़ज़ल मुझको सुनाने आजा !

by salimraza rewa 9981728122

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