तू चाहे या न चाहे यारा
बिन मर्जी तेरे गले पडूँगी !
पयार की प्यास जब जागने लगे
विरह की आग दिल जलाने लगे
तब देना तुम आवाज मुझे
बनके बदरिया बरस पडूँगी !!.
जब रस्ते सुनसान लगने लगे
अकेले में कदम डगमगाने लगे
न बन सकी हमसफ़र तो क्या
बन के राही संग चल पडूँगी !!
हर तरफ वीरानी छाने लगे
जिंदगी बोझिल सी लगने लगे
करके बंद आँखे लेना तुम पुकार
बन के हंसी चेहरे पे छलक पडूँगी !!
इंतज़ार में दिल जब खोने लगे
यादो से विचलित मन होने लगे
तुम देख लेना एक नजर उठा के
मै बन के साया तेरे संग मिलूंगी !!
दिल के दरवाजे दस्तक होने लगे
खुली आँखों में सपने दिखने लगे
तब रहना तुम जरा संभलकर
जिंदगी के हर मोड़ पर मै खड़ी मिलूंगी !!
तू चाहे या न चाहे यारा
बिन मर्जी तेरे गले पडूँगी !!
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डी. के निवातियाँ __!!!

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