कोई बताये बढ़ती जाए दिन पर दिन महंगाई !
आज देश में छुरी चलाता क्यों भाई पर भाई !!
नफरत की इस आंधी ने उजाड़े कितने चमन
क्यों रिश्तो में बढ़ती जाती दिन पर दिन खाई !!
भूल गए क्यों तुम कुर्बानी, वीरो ने जान गवाई
फिर भी तुमको अपनी आजादी रास नही आई !!
कहीं किसी का लाल मरा है, कही किसी का सुहाग उजड़ा है !
कही बच्चे ने बाप को खोया,कही बहन ने खोया अपना भाई !!
शर्म करो कुछ ऐ खुदा के बन्दों, क्यों तुमको लाज़ न आई !
किस मुख से करोगे सामना, जिसने तुम पर नेमत बरसाई !!
[[___________डी. के, निवातियाँ __________]]
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