कवि इतिहासकार है संवेदना का मनुष्यता का । और बल्कि जीवनी लिखता है समय की । अभिव्यक्ति उसकी चतुराई नहीं विवशता है बिम्ब और शब्द झूठे प्रलाप नहीं जड़े हैं विस्तार की । उसका मर्म हैं । – औचित्य कुमार सिंह (07.10.2015)
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