प्यास मिट नहीं जाती आंसू पी पी कर
ज्वालामुखी तो फूटता ही है सब कुछ निगलने के लिए
मशाल बुझ जातें हैं काल के तम में कई बार
इक चिंगारी बच ही जाती है फिर आग लगाने के लिए
जाम ने थामा है हाथ मेरा फिर से एक बार
मद बना है हथियार गम को हराने के लिए
ज्योति को जीत पवन ने बडा एहसान किया है
दिल जल रहा था नाहक थोडे उजाले के लिए
अंधियारे ने बखूबी दोस्ती निभाई है अपनी
झूठी रोशनी पर भरोसा किया सिर्फ पछताने के लिए

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