रविवार, 4 अक्टूबर 2015

तुम वार तो करो

पेड़ अगर सूख गए तो क्या
उसे पानी तो दो
तुम अगर थक गए तो क्या
थोड़ी सांस तो लो

कोई साथ न दे रहा तो क्या
खुद पर भरोसा तो करो
हिम्मत टूट रही तो क्या
तुम वार तो करो

हार यहाँ सभी ने देखे हैं
फिर भी मौके उन्होंने हज़ार पाय हैं
अपने मौके का इन्तेजार करो डट कर
हर परेशानी से मिलो हंस कर

मंजिल अपनी पास तुम पाओगे
तुम अपनी जंग में जीत जरूर जाओगे
कोई तुमसे तुम्हारा हक़ ना छीन पाएगा
तुम्हारे लिए किस्मत भी खुद चल के आएगा

आँखों से आंसू निकल रहे तो क्या
तुम अरमान तो करो
अपनी कल की खुशियो का
तुम एहसास तो करो

रोक न पाये तुम्हे कोई
तुम ऐसी रफ़्तार तो भरो
हिम्मत अगर टूट रही तो क्या
तुम एक प्रयास तो करो
तुम एक बार वार तो करो

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