मंगलवार, 6 अक्टूबर 2015

रान्झना (गाना)

दिल को छू जाती है,
सपनों में नज़र आती है।
हर रात निंदिया न आए,
हर रात यूँ ही मन ख़्यालो में खो जाए।

कुछ यादें मिटती नहीं,
कुछ धुंधली हैं हो जाती ।
वक़्त का कारनामा तो देख तू,
इस ज़िंदगी में पहले न कभी साथ पाया हूँ ।

रांझणा वे,
मेरी गल सुन जा रे,
तू भी कह दे कुछ,
इन सुन्दर होठों से।

तुझसा न देखा कभी,
न ही तुझसा मिला है कोई।
अब मेरी शिकायत ही नहीं ,
है ऊपरवाले से अब कोई ।

ऐ ज़िंदगी,
मेरी खुशी की वजह,
अब तू है बन गयी,
मेरे दिल में तू है पा गयी एक ख़ास जगह।

तुझे देखूँ दिन-भर,
तुझे सोचूँ रात-भर।
तुझे देखे बिना हो जाता हूँ बेचैन,
रातों को सो न पाता हूँ इस क़दर ।

रांझणा वे,
मेरी गल सुन जा रे,
तू भी कह दे कुछ,
इन सुंदर होठों से।

तेरे बगैर जीना,
लगे जैसे धूप में पसीना।
हर लम्हा पसीना बहता है,
यह शरीर मुझसे कहता है।

कि अगर साथ मिलता,
तो आज मैं अकेला न होता ।
तेरी पलकों से आँसू पोछनेवाला ,
बनाकर बैठा है ऊपरवाला।

इतना प्रेम करता हूँ तुझसे,
अपनी जान की कुर्बानी दे दूँ तेरे लिए।
तुझ पर मरता हूँ हर डगर,
आ, बन जा मेरी हमसफ़र।

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