शनिवार, 10 अक्टूबर 2015

शर्मिन्दा जिनके खुश्बू से, SALIM RAZA REWA

००
शर्मिन्दा जिनके खुश्बू से बू-ए गुलाब है,
जिनके चमक से रौशन महो आफताब है !
सूरत पे जिनके नाज है परवरदिगार को,
वो सूरते रसूल खुदा कि किताब है !!
००
इब्त्दा तुझी से है इन्तहा तुझी से है ,
ये निजाम दुनिया का ऐ खुदा तुझी से है !
जिन्नों इन्शां बह्रो-बर सब तेरे करिश्में हैं,
इस जहान फानी में जो बाना तुझी से है !!
००
जमीं फलक में सितारों में उनका चर्चा है,
चमन में फूल बहारों मेम उनका चर्चा है !
नबी के शान व अजमत का जिक्र क्या करना,
क्लामे पाक के पारों में उनका चर्चा है !!
००
जो उसकी याद में दिल बेकरार करता है,
खुलूसो प्यार से सजदे निसार करता है !
उसे ही खुल्द की नेमत नसीब होगी “रजा”,
खुदा का जिक्र जो लेलो निहार कर्ता है !!

०० सलीम “रजा” 9424336644 ००

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