एक ओस की बूँद टपका दो दिल पर
पिघल न गया हो, या जल न गया हो अगर
समझो मर गया है आदमी
कोई विषाक्त झोंका बह गया है हम पर
जीवनीशक्ति जरा भी हो प्रबल अगर
भाप सा उठ कर बनेगा वह बादल
फिर बरसेगा दिल पर हर
बन कर वह जल शीतल
एक बूँद के हजारों प्रतिरुप
प्रेम का एक अनंत कूप
अपनी गगरी भर लो आज
अपूर्ण है दिल का साज
प्रेम का प्याला पी लो कंठ भर
एक बूँद फिर टपका दो दिल पर
— Uttam
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