ज़ुल्फो में उनकी उलझ कर, इस कदर खो गये हम कहीं; कि तस्वीर भी उनकी, यादों में नहीं बसा पाये । अब गर सामने से उनके, बिना सलाम गुज़र गये; तो डर है ता-ज़िन्दगी, वो हमें वे-व़फा ना समझती रहें ।
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