आ ठहरा है तूफ़ान ज़िन्दगी में आके ।
जबसे गयी है तू मेरा दिल तोड़ के ।।
तू उजाड़ चली है मेरे सपनो के नगर
मुझे थमा गयी है तू तोहफें गम के ।
मेरे दिल की आलम आके देख तो सही
ज़िन्दगी के पल पल कटता है मुश्किल से ।
अरे सुन मेरे दिल की इल्तिज़ा कभी तू
लिख प्रेम दर्द भरी ख़त मेरे नाम से ।
चाँद सा चेहरा मुरझाया है तुमबिन
मेरे आँगन आ जा दिल में प्यार लेके ।
प्रेम बरसने आ जा बनके सावन
भिगो जा तपती हुई आँगन दिल के ।
तुम्हारी इंतज़ार है हरघडी ज़िन्दगी को
कुर्बा है दिल आ आजमा के देख ले ।
आके मिल तू मुझमें इस तरह
जैसे मिलती है नदी सागर से ।
क्या – क्या गम सहे तेरे लिये
आके पूछ तू इस पागल से ।
दुष्यंत पटेल [कृष]
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