गुरुवार, 8 अक्टूबर 2015

अपनापन

नाता भी कैसा
बददुवां भी कम
तरस आता १

भेदी हो घर
होती है शब्द ग़ुम
रिश्तों का नीवं २

तूफानी हवा
गुजरे तो अंदर
देखता रहा ३

जीता भी हारा
सब से हो अकेला
प्यार से मारा ४

अपनापन
नमक छिड़कता
देखो तमासा ५

दोस्त पड़ोस
परखता तुझे को
चौकना रहो ६

१०/०८/२०१५

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