मंगलवार, 13 अक्टूबर 2015

शान......... (शायरी)


शान से जीना कला है जिंदगी की
जो ख़ुशी-गम को एक साथ रखते है !
!
गैरत-ऐ-हया होती है जिनके जहन में
दुनिया उन पर हमेशा नाज करती है !!

!
!
!

डी. के. निवातियाँ _______@@@

Share Button
Read Complete Poem/Kavya Here शान......... (शायरी)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें