गुरुवार, 8 अक्टूबर 2015

आगोश में यार के ......

जाने दिल को क्या हुआ पड़ा था तेरे प्यार में !
जहां की सारी खुशिया आती थी नजर यार में !!

कोई तुम सा ना मिला दुनिया के बाजार में !
उम्र अपनी गुजार दी एक तेरे इंतज़ार में !!

तन खोया मन भी खोया जान से गये प्यार में !
नजरो ने ढूंढा सुदूर तक मिले न तुम जहान में !!

कैसी मनहूस घडी थी वो जब जुदा हुए यार से !
अरसा बीत गया अब तो, दरस ना हुए यार के !!

ऐ खुदा रहम कर, ना इतना दर्द दे किसी को प्यार में
कुछ पल तो जीने दे रख के सर, आगोश में यार के !!

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{{_______डी. के निवातियाँ ______}}

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