कुदरत के है रन्ग अनूप,
उसका नैनी झील है जीता जागता स्वरूप।
अजूबा है कुदरत का अनोखा है रूप,
इमारतो के बीचो बीच नैनी झील मे है नीर भरपूर।
इस बेमिसाल कुदरत के स्वरूप को खूथबसूरत है बनाना,
आज और अभी से बीडा यह है हमे निभाना।
जन्नत इस्री का है नाम जनाब,
गद्द गद्द हो जाता है ह्दय इस कायनात को देखकर जो है लाजवाब।
खुदा के इस बेहिसाब आलम को हमे है सराहना,
जन्नत जो उसने बख्शी उसे है हम सबको मिलकर है सम्भालना।
प्रक्रती ने सबको है जोडा इस कदर,
ना जीवित रह पायेगे ह्म सभी हटा कर नज्रर।

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