शनिवार, 8 अगस्त 2015

छाया अंबा की (हाइकु)

[१]
छाया अंबा की
मेरी सुखी जीवन
हूँ गुलजार !!

[२]
अम्बर नीली
हरी भरी धरती
बहती नदी !!

[3]
राधा नगरी
श्याम के आगमन
प्रीत संगम !!

[4]
न्याय नगरी
गुनाह होती रोज
किसका दोष !!

[5]
धरती प्यासी
खिली सावन धुप
कृषा की आश !!

[6]
चिड़ियाँ प्यासी
तपती रेगिस्तान
है हलचल !!

[7]
पत्थर दिल
तुझे माना है रब
क्योकि सितम !!

@@दुष्यंत पटेल @@

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