ठहर गए तो ज़िंदगी का क्या मजा |
चलते रहे तो मिल ही जाएगी,
जीने की वजह ||
जब नहीं है पता,
क्या होना है अगले पल में,
तो क्यों बुने हम सपने |
जब नहीं है पता,
क्या खोना है कल में,
तो क्यों चुने हम अपने ||
चाहत तो है कुछ पाने की,
पर खोने का भी गम नहीं |
मेरी ज़िंदगी तो एक मुस्कान है,
पर कोई हमदम नहीं ||

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