मेरी माँ ………………………….
अंधेरो में तूने ही तो था दिखाया रास्ता
जब रूठी ज़िंदगी थी तू थी साथ मेरी माँ
इस दुनिया ने भी मुझको बेसहारा किया
मेरी माँ तूने ही तो हरदन सहारा दिया
हाथो की लकीरो ने भी जब मुझको छोड़ा था
सारे अपनों ने मेरा जब भरोसा तोडा था
जो थी मंजिल ज़िंदगी की वो भी मुझको छोड़ गई
सारे अरमा सारे सपने वो मेरे तोड़ गई
तप रहा था जल रहा था जिस जलन से मेरी माँ
तूने मुझको यह संभाला उस तपम में मेरी माँ
इस वक़्त की करवटों में हर वक़्त के एहसास में
हे माँ तू ही रहे हर लम्हा पास में
मेरी माँ………………………….
तुषार गौतम “नगण्य”
Read Complete Poem/Kavya Here मेरी माँ ...........
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें