अगर मैं सुन्दर हूँ|
मुझे प्यार मिला,
स्नेह मिला,
मिल रही है प्रशंशा।
कार्यरत मैं,बेरोजगार नहीं!
मेहनत के बलबूते जी रही|
स्नेह, प्यार ,दुलार ,लाड से,
प्रफुलित हो मैं चहक रही|
इज्जत है,
एहसास पूर्णता का हो रहा|
अगर कल को ये सब ना रहा!
दोगे क्या तब भी इतना प्यार?
सुन लेना तब भी मेरी पुकार,
मैं हर नारी की आत्मा बन,
करती हूँ सबसे एक सवाल|
क्या दोगे तब भी इतना प्यार?
अगर भस्म हो जाए सुंदरता मेरी,
हे पुरुष सत्तात्मक समाज!
स्थान मुझे दोगे क्या तुम??
इस साहित्य धरातल पर|
निखर जाऊँ मैं और अगर!
फिर भी देना इतना ही दुलार,
क्या दोगे तब भी इतना प्यार।
मेरी कलम से
रोशनी यादव

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