।।ग़ज़ल।।इरादा अब नही होता ।।
सही है प्यार में गम से जादा कुछ नही होता ।।
मुद्दत अब नही होती इरादा अब नही होता ।।
मिले थे आप जैसे ही हजारो दोस्त पहले भी ।।
बिछड़ कर भूल जाते है वादा अब नही होता ।।
बड़ी तखलीफ़ होती है मिलकर भूल जाने से ।।
करु मैं लाख कोसिस गम आधा अब नही होता ।।
बड़ा बेबाक था मैं भी सजी थी दोस्त की महफ़िल ।।
ठहर कर सोच लेता हूँ आमादा अब नही होता ।।
सुनो ऐ दोस्त तुम मेरे सौदे हो रहे दिल के ।।
ठहर कर सोच लेना दिल नादाँ अब नही होता ।।
…..R.K.M
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