सोमवार, 3 अगस्त 2015

लड़की

कोई मासूम ख्वाब है लड़की
जिल्दवाली किताब है लड़की
है सितम आपका हमारा जो
हर जगह लाजवाब है लड़की
सारे रिश्ते गुनाह है उसके
सबके बदलते हिजाब है लड़की

खून जब रंग सुखकर होगा
सब कहेंगे गुलाब है लड़की
कोई मासूम ख्वाब है लड़की
जिल्दवाली किताब है लड़की
वक़्त मत पूछ एक लड़के से
वक़्त बेहद ख़राब है लड़की
वह ना जाने क्यों माँ यह कहती है
किस जनम का हिसाब है तू लड़की
मेरी खातिर कोई गजल है लड़की
खुद की खातिर अंदाज़ है लड़की
एक जिल्दवाली किताब है लड़की
कोई मौसम ख्वाब है लड़की
कोई मासूम ख्वाब है लड़की |

कनक श्रीवास्तवा

Share Button
Read Complete Poem/Kavya Here लड़की

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें