गुरुवार, 6 अगस्त 2015

इश्क़ में जब से ..... / गज़ल / महेश कुमार कुलदीप 'माही'

इश्क़ में जब से हम गिरफ़्तार हो गए |

पल में जमाने भर के गुनहगार हो गए ||

रूठना नहीं अब मनाना हमें आता है,

पहले से ज़्यादा हम समझदार हो गए ||

ख़बर जो फैली मेरे इश्क़ होने की,

सबकी नज़र में हम बेकार हो गए ||

हँसके जो उनकी तारीफ़ क्या कर दी,

वो कहते हैं हम बड़े कलाकार हो गए ||

जुबान पर रहती थी इंकलाबी बातें कभी,

वक़्त के साथ हम भी बीमार हो गए ||

राहे-महोब्बत का असर तो देखिए ‘माही’,

दोस्त भी दुश्मन भी बेशुमार हो गए ||

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