लिखूँ तो क्या लिखूं वक्त के मारे चल्ता हूँ क्या है बड़ा धूल है क्या जिसने चुभा बड़ा है वह बिखरी ग़ुम होते जो धूल है आवाज गूंजे दिल धड़कते क्या से क्या हो गए सबकुछ चल बसें पलक झपकते भूकम्पमें |
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