शनिवार, 8 अगस्त 2015

"यादें"

कभी-कभी यूं भी होता है
कि आप एक शिद्दत से
कुछ याद करते है मगर
वक्त रेत की मानिन्द
आपकी मुट्ठी से फिसल जाता है।
कभी-कभी यूं भी होता है
कि अकारण ही
कुछ देखकर,कुछ सोचकर
कुछ यादें आपके दिल में उभर आती हैं।
मगर जज़्बातों की अनदेखी
कभी आपकी,कभी उसकी
उन मीठे लम्हों को दिल में
कहीं दफन कर देती है।
कभी अचानक
दिल के दरवाजे पर दस्तक दो तो
यादों के समन्दर में
एक हल्की सी अाहट होती है
और दिल गहराइयों से कहीं एक आवाज उभरती है
ओ—–ऐसा क्या ?

“मीना भारद्वाज”

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