गुरुवार, 6 अगस्त 2015

एक तरफ़ा प्यार

तेरी लबो की मुस्कानों से हम दिन रात समझते हैं,
तु हँस दे तो हँसते है, तु रो दे तो रोते है,
तेरी मेरी मोहब्बत कुछ ऐसी है,
हम मुड़ मुड़कर देखते है , तुम देख देखकर मुड़ती हो।

मेरी दिवानगी को भले तु पागलपन समझलेना,
मुझे भले रोना पड़े पर उसकी कीमत पे तु हँसलेना,
मेरी मोहब्बत को तु तब ना समझती थी,
मैं तुझे देख के हँसता था , तु मुझे देख के हँसती थी।

कई बार किया इजहार ,पर तुने किया इनकार,
तु मानी तो मैं रूठा , अहम में कह दिया प्यार था झुठा,
हम दोनो ना सो पाये थे , सिर्फ़ रो ही पाये थे,
पर तु मेरे लिए तड़पती थी, मैं तेरे लिए तड़पता था ।

तेरी मोहब्बत की गहराई को मैंने तब तक नहीं समझा,
जब तक तेरा जनाजा मेरे घर से नहीं गुजरा,
मेरा दिल दर्द से तड़प उठा, आँखों में आँसु था ,
तु कब्र पे सो रही थी , मैं सोकर सपनों में रो रहा था।

मैंने तुझे बहुत ढूढ़ा ,पर तु मिल ना पाई,
आंसुओ से मैंने अपने दिल की आग बुझाई,
पर किस्मत से तेरा मेरा मिलना जरुरी था,
मिलन का कुछ एहसास ऐसा था,
मैं हँस हँस के रो रहा था , तु रो रो के हँस रही थी ।

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