तुम्हे चाहकर अपनी मुश्किल ही बढ़ा बैठे है ।।
रास्ते और है पर मंजिल ही भुला बैठे है ।।
मत सोच कि तेरी अदाओ की कोई मिसाल नही ।।
ये तो हम है कि आपसे दिल ही लगा बैठे है ।।
बेताब और भी लोग है फ़ासले मिटाने के लिये ।।
दिल के करीब रखकर बोझिल ही बना बैठे है ।।
तुमसे मिलना इक इत्तिफ़ाक है कोई चाल नही ।।
जबकि तेरी चाहत में ही खुद को गवां बैठे है ।।
फिर भी मत सोच तुमसे प्यार नही करता मैं ।।
तेरे इंतजार में महफ़िल को सजा बैठे है ।।
……. R.K.M
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