सारी बातो में, ख्वाबो की रातो में !
बात कुछ तो ख़ास है तुझमे यारा
जो खोये रहते है तेरे ही ख्यालो में !!
कभी चाहत का पैगाम लिखो
लेकर वफ़ा की कलम हाथो में !
कर दो जिक्र कभी हमारा भी
अपने नफरत भरे लफ्जो में !!
कर लो सवार यादो की कश्ती में
उतार देना जब चाहो हमे राहो में !
चले जाएंगे दूर एक इशारे पर
चंद लम्हे ठहरा दो इन सांसो में !!
मानगे तुम्हारी वफ़ा को उस दिन
जब करोगे जिक्र अपनी बातो में !
होगी चाहत मिलन की हर पल
देखोगे सपने हमारे तुम रातो में !!
गुम जाते है अक्सर शोहरत की बुलंदियों में
कही खो न जाना तुम इन बड़ी बड़ी बातो में !
तब होगी रोज़ मुलाक़ात नए – नए लोगो से
कही भुला न देना हमको उन रिश्ते नातो में !!
डी. के. निवातियाँ ________@@@
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