“तेरी तरह एक दिन, मैं भी यह मान ही जाउंगा, जो देखा गया है सपना, वो कभी न हो सकता अपना”
क्योंकि, लक्ष्य के लिए काबिल होना, बहुत कुछ होता है, परन्तु, लक्ष्य को हासिल करना, ही सब कुछ होता है -परीक्षित भार्गव
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