।।गजल।।प्यार की ख्वाहिस न थी।।
ऐ दोस्त मुझे तेरे प्यार की ख्वाहिस न थी ।।
ये तेरा ही कहर था मेरी आजमाइस न थी ।।1।।
तब तुम तोड़कर दोस्ती भी चले गये मेरी ।।
जब तुमसे दूर रहने की भी गुंजाइस न थी ।।2।।
फर्क तो पड़ता ही है हालात बदल जाने से।।
पर तेरे बदल जाने की कोई फरमाइस न थी ।। 3।।
कल ही लौट कर चला आया तेरे शहर से मैं ।।
तेरी तस्वीर न थी अदाओ की नुमाइस न थी ।।4 ।।
बस दिल जीत लिया था तेरा रूठना मनाना ।।
वरना इस दिल की कोई पैमाइस न थी ।।5।।
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